साइंस काॅलेज में शिक्षण प्रविधि पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन | shivnath college | Rajnandgaon
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साइंस काॅलेज में शिक्षण प्रविधि पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन.
Posted by / Sunday, 20 Aug, 2017

 

राजनांदगांव। शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय में दिनांक 18.08.2017 को कक्ष क्रमांक-09 में एक दिवसीय कार्यशाला शिक्षण प्रविधि विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के 30 प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम प्रातः 10.30 बजे महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. सुमन सिंह बघेल के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की संयोजक डाॅ. एलिजाबेथ भगत के द्वारा अतिथि विशेषज्ञों का स्वागत परिचय कराते हुए कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रगान के द्वारा किया गया। अतिथि विशेषज्ञ के रूप में प्राचार्य डाॅ. आर.एन.सिंह, शास. स्नातकोŸार दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव, प्रचार्य डाॅ. राजेश पाण्डेय, शास. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, वैशाली नगर भिलाई उपस्थित हुए।
महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. श्रीमती सुमन सिंह बघेल द्वारा सत्र का प्रारंभ स्वागत उद्बोधन द्वारा किया गया। विषय विशेषज्ञ के रूप में डाॅ. आर.एन. सिंह ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उदाहरण देते हुए अतिथि व्याख्याताओं को बेहतर शिक्षा प्रदान करने हेतु जागरूक किया और विŸावाद, सैन्यवाद तथा शासकीयवाद का उदाहरण देकर शिक्षण की कार्यप्रणाली को समझाया और शैक्षणिक गुणवŸाा पर जो दिया। प्राचार्य डाॅ. राजेश पाण्डेय ने विकसित देशों की शिक्षण प्रणाली और भारत जैसे विकासशील देश की शिक्षण प्रणाली के अंतर को स्लाइड के माध्यम से समझाया और कहा कि प्राध्यापकों की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री के लिए प्रोत्साहित न करें बल्कि ज्ञान के क्षत्र में प्रोत्साहित करें। इसके लिए देश-विदेश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों जैसे बिलगेट्स, मार्कजुकरबर्ग, रामानुजन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एवं आर्यभट्ट आदि का उदाहरण देते हुए समझाया। इसके पश्चात् अतिथि व्याख्याताओं का समूह चर्च के अंतर्गत विषय ‘‘वर्तमान परिपेक्ष्य में विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली की प्रासंगिकता’’पर चर्च हेतु अतिथि व्याख्याताओं को तीन समूहों में विभाजित किया गया तथा प्रत्येक समूह से एक प्रतिभागी द्वारा विचार प्रस्तुत किया गया।
द्वितीय सत्र में सर्वप्रथम सुश्री स्वाति तिवारी सहायक प्राध्यापक वनस्पति शास्त्र ने नेट/सेट एवं जेआरएफ की तैयारी के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। महाविद्यालय के यूजीसी प्रभारी डाॅ. ए.एन.माखीजा ने उपस्थिति पंजी तथा डेली डायरी बनाने एवं इसमें होने वाले संभावित त्रृटियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। सभी अतिथि व्याख्याताओं से फीडबैक लिया गया। फीडबैक का विश्लेषण के अंतर्गत सर्वप्रथम प्रतिभागियों की शैक्षणिक योगयता ज्ञात हुआ कि 37 प्रतिशत प्रतिभागी स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त है, 30 प्रतिशत एमफिल पीएच.डी. तथा 33 प्रतिशत प्रतिभागी ने/सेट के साथ अन्य डिग्रीयां प्राप्त है।
शैक्षणिक कार्य के अनुभव संबंधी प्रतिभागियों से ज्ञात करने पर पाया गया कि 70 प्रतिभागियों का अनुभव 1-5 वर्ष तक एवं 23 प्रतिशत 5-10 वर्ष तक का अनुभव तथा 7 प्रतिशत प्रतिभागी का अनुभव 10-15 वर्ष के बीच रहा।
इस कार्यशाला का विषय शिक्षण प्रविधि की उपयोगिता संबंधित राय जानने पर ज्ञात हुआ कि शत प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसको उपयोगी बताया, तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि के लिए भी शत प्रतिशत प्रतिभागियों ने आवश्यक माना। व्याख्याताओं ने कार्यशाला को बेहतर बनाने सुझाव मांगा गया जिसमें सुझाव के रूप में निम्न बातें सामने आई 40 प्रतिशत प्रतिभागियों का कहना है कि इस प्रकार की कार्यशाला में अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को बुलाया जाना चाहिए। 20 प्रतिशत प्रतिभागियों का कहना है कि वर्कशाॅप की अवधि को बढ़ाया जाए। 30 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि प्रतिवर्ष इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित की जाए तथा प्रायोगिक आधारित होना चाहिए। 10 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि हर बार नये विषय पर ग्रुप डिश्कशन हो तथा ज्यादा संस्था में अतिथि व्याख्याताअें को सम्मिलित होना चाहिए।
कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ. एस.आर.कन्नोजे के द्वारा किया गया, इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ. निर्मला उमरे, श्रीमती निर्मला जैन, डाॅ. नागरत्ना गनवीर, श्री अनिल चन्द्रवंशी, श्री परेश् वर्मा, श्रीमती सीमा ए. लाल, कम्प्यूटर आॅपरेटर षडानन वर्मा तथा अधिक संख्या में अतिथि व्याख्याताओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में डाॅ. फुलसो राजेश पटेल द्वारा आभार व्यक्त किया गया।