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राजनांदगांव जिले में विशिष्ट विज्ञान शिक्षा के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिये तमसा मा ज्योतिर्गमय के घोष वाक्य के साथ एक सितम्बर 1986 को शासकीय विज्ञान महाविद्यालय राजनांदगांव की स्थापना की गई. प्रथम प्राचार्य के रूप में श्री बी.एल. मुण्डेल को नियुक्त किया गया. प्रारंभ में यह संस्था दिग्विजय महाविद्यालय परिसर में, तत्पश्चात् कमलादेवी महिला महाविद्यालय के पुराने भवन में संचालित की गई. 16 नवम्बर 1987 को महाविद्यालय हेतु नये भवन का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री मोतीलाल वोरा के करकमलों से तत्कालीन विधायक श्री बलबीर खनूजा की अध्यक्षता में किया गया. 4 फरवरी 1992 को तत्कालीन निर्माण मंत्री श्री हिम्मत कोठारी द्वारा माननीय राज्य मंत्री उच्च शिक्षा श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय तथा माननीय श्रम राज्य मंत्री श्री लीलाराम भोजवानी की उपस्थिति में वर्तमान भवन उद्घाटिक हुआ जो नगर की पारंपरिक धरोहर रानीसागर की दक्षिण दिशा में ऊर्जा पाक्र एवं वन विभाग के उद्यान के समीप गौरव पथ पर सुरम्य प्रकृति की गोद में स्थित है.
सन् 2008 में छत्तीसगढ़ की प्राणदायिनी शिवनाथ नदी के नाम पर इस महाविद्यालय का नया नामकरण किया गया. महाविद्यालय में वर्तमान में बी.एस.सी. जीव विज्ञान, गणित एवं कम्प्यूटर विज्ञान के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है.
सन् 1997-98 से गठित जन भागीदारी समिति के अध्यक्षगणों श्री अजीत जैन, श्री अशोक फड़नवीस, श्री भोलाराम मिश्रेकर तथा वर्तमान अध्यक्ष श्री विवेक साहू के सक्रिय सहयोग से महाविद्यालय ने अपनी शिक्षा यात्रा के पच्चीस वर्ष पूर्ण किये है.
रजत जयंती के पावन अवसर पर हमारी कामना है कि यह महाविद्यालय राष्ट्र निमार्ण में अपना सक्रिय योगदान देते हुए निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होता रहे.